कर्ज में डूबे किसान की हारती जिंदगी| घूट घूट कर दम तोड़ ते उसके सपने|farmars,indian agriculture

अगर आप एक भारतीय हैं| आपने किसी किसान के घर जन्म लिया है तो इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़ लेना– Indian agriculture system

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आपके मन में किसान के प्रति सम्मान हैं तो इस पोस्ट को इतना शेयर करना, इतना शेयर करना कि यह पोस्ट भारत के हर मोबाइल में पहुंचनी चाहिए|

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आज हम आपको भारतीय किसान की कर्ज में डूबती जिंदगी की दुख भरी कहानी बताने वाले| जिस देश के अंदर “जय जवान- जय किसान” का नारा प्रमुखता से दिया जाता हो उस देश के किसान की ऐसी हालत है कि सोचने से भी डर लगता है| जो खेती किसान का अभिमान होती है वही खेती आज के समय एक भारतीय किसान को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रही है| क्या कारण है इसके पीछे क्यों आज का किसान अपनी खेती से अपने परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है| इसके पीछे एक नहीं बहुत सारे कारण हैं जिसकी वजह से आज किसान की यह हालत हो गई है|

आज हम आपको बताएंगे एक किसान की दुख भरी कहानी सिलसिलेवार तरीके से किस प्रकार इस देश के किसान को हर समय धोखा दिया जाता है,हर समय उसे ठगा जाता है|

आज के किसान की ऐसी हालत हो गई है कि उसे अपनी खेती से 1 दिन की मजदूरी में जितना पैसा मिलता है,उतनी आमदनी भी नहीं हो पा रही है ऐसे में किसान बेचारा क्या करें|

इतना सब कुछ होने के बाद भी इस भारत देश के अंदर कोई भी- NGO,सरकार, समाज सेवक, अपने आप को किसानों के नेता बताने वाले कोई भी संजीदा नहीं दिखाई देते हैं|जो किसानों की आमदनी बढ़ाने को लेकर दिल से कोई काम करते हो|

आज के किसान की हालत ऐसी हो गई है| जिस फसल को वह अपने खेत में बोने के बाद अपने बच्चों की तरह रखता है पूरे 4 महीने अपने शरीर से भी ज्यादा उसकी रखवाली करता है| उस फसल का ना तो उसे सही मूल्य मिल पा रहा है ना बेमौसम बारिश हो जाने के बाद उसे मुआवजा राशि मिल पाती हैं|

किसान जिधर देखता है उधर हर सरकार वादों की जड़ी लेकर खड़ी रहती हैं| हम किसान के लिए यह करेंगे|हम किसान के लिए वह करेंगे| हम किसान की आय को दोगुना कर देंगे| लेकिन यह सारे वादे हकीकत से कोसों दूर हैं|

लेकिन आश्चर्य तो तब होता है जब किसान की किसी फसल का मंडी के अंदर थोड़ा सा भी अच्छा भाव मिलने लगता है| तो इस देश का मीडिया, और शहरों के अंदर रहने वाली मॉडर्न जनता,रात दिन हो हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं| सड़कों पर उतर जाते हैं, प्रदर्शन होने लगते हैं, सरकार के ऊपर दबाव बनाया जाता है कि किसान की फसल का मंडी भाव आखिर बढ़ गया तो कैसे बढ़ गया|

लेकिन जब इसी किसान का प्याज, टमाटर, आलू, दूध सड़कों पर फिक रहा होता है|₹1 से ₹2 किलो मंडी भाव मिल रहा होता है|किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहा होता है उस समय ना तो इस देश का मीडिया कोई आवाज उठाता है, ना इस देश की मॉडर्न जनता कुछ बोलती है| आखिर इतना दोगला व्यहार इस देश के किसान के साथ क्यों किया जाता है यह आज दिन तक समझ नहीं आया| क्या इस देश मैं किसान होना या किसान के घर जन्म लेना कोई जुर्म है|

शहरों में रहने वाले लोग सोचते हैं उनके पास अच्छा घर हो, अच्छी गाड़ी हो,उनके बच्चे किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करें| बड़े होने के बाद उन्हें अच्छी नौकरी मिले, अपना अच्छा परिवार बसा पाये|

लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि यह सारी इच्छाएं इस देश के कर्ज में डूबे किसान की भी होती होगी|

होती है साहब होती हैं आपको शायद इस बात का एहसास नहीं होगा लेकिन इस देश के किसान के भी सपने होते हैं|

लेकिन अफसोस इस देश के किसान के सारे सपने रात को खेत की मेड पर खड़े किसी पेड़ की बड़ी डाली से लटक कर दम तोड़ देते हैं|

यह हकीकत है साहब!

इस देश का किसान आखिर उम्मीद करें तो किस से करें हर तरफ सिर्फ किसान के ही दुश्मन घूम रहे हैं|

किसान को उम्मीद सिर्फ 2 सरकारों से होती हैं| एक आसमान में कहीं दूर रहने वाली सरकार और दूसरी उसके मतदान से चुनी गई सरकार|

लेकिन आश्चर्य की बात है कि जिस सरकार को वह अपना मतदान करके चुनता है वहीं सरकार सबसे ज्यादा उसकी भावनाओं के साथ खेलती है|

भारत देश के अंदर हर राज्य में कोई भी राजनीतिक पार्टी हो उसकी जुबान पर किसान का नाम तभी आता है जब उस राज्य में चुनाव नजदीक आ रहे हो|

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाते हैं किसानों को बहलाने फूसलाने और एक बार फिर से ठगने की पूरी तैयारी कर ली जाती|

चुनाव से पहले हर राजनीतिक पार्टी किसानों को बड़े से बड़ा प्रलोबन देने में जुट जाती हैं| हम आपका कर्ज माफ कर देंगे, हम आपका बिल माफ कर देंगे, हम आपके लिए फ्री में घर बना देंगे, एक से बढ़कर एक वादे किए जाते हैं किसान से| और किसान बेचारा करे तो करे क्या अपने परिवार को बचाने के लिए उसे इन नेताओं की झूठी बातों पर भी दिल पर पत्थर रखकर यकीन करना पड़ता है| जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं राजनीतिक पार्टियों के हाथों में सत्ता आती हैं और किसानों से किए सारे वादे किसी डस्टबिन में डाल कर फेंक दिए जाते हैं|

अंत में मैं इस देश की सरकारों से इस देश की जनता से सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा| AC कमरों में बैठकर ना तो इस देश के किसान की आय को आप दोगुना कर सकते हो| ना इस देश के किसान को आप कर्ज मुक्त बना सकते हो| तब तक आप यह सारे काम नहीं कर सकते हो जब तक इस देश के किसान की फसल का उसे उचित मूल्य नहीं मिल जाता|

अगर इस देश के किसान को और इस देश की खेती को बचाना है| तो किसान को उसे उसकी फसल का सही मूल्य देना शुरू कर दो वरना वह दिन भी दूर नहीं होगा जिस दिन इस देश का किसान भी मर जाएगा और देश की खेती भी मर जाएगी|

उस दिन वोट मांगने किस किसान के पास जाओगे

इस देश की जनता से भी मैं यही कहूंगा कि जब भी कभी रात को घर पर डाइनिंग टेबल पर खाने के लिए बैठो, आपकी प्लेट में जो रोटी आई हैं| उस रोटी को देखकर एक बार उस किसान को जरुर याद कर लेना और यह सोचना जरूर की जो रोटी आप खा रहे हो|उसके पीछे किसान के बच्चे पता नहीं कितने दिन भूखे रहे होंगे|

साहब

किसान का लहू पसीना बनकर टपकता है,

तब इस माटी में अन्न उपजता है||

“जय जवान जय किसान”

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आपके दिल में किसान के प्रति जरा सा भी सम्मान है ना, तो इस पोस्ट को इतना शेयर करना, इतना शेयर करना कि यह देश के हर मोबाइल में पहुंच जाएं|

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