किसान की आवाज सुनो सरकार, धान और गेहूं का समर्थन मूल्य करो 2500 पार|

भारत,हमारा प्यारा भारत, हमारा महान भारत,

इस महान देश का महान किसान जो आज देश की सरकारों की अनदेखी की वजह से आत्महत्या करने को मजबूर है|farmars, indian agriculture,

आज के इस महंगाई के टाइम में बाजार में मिलने वाली हर एक वस्तु के दाम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है लेकिन सिर्फ किसान है, जिसकी उगाई गई फसलों में कोई बढ़ोतरी नजर नहीं आती है| ऐसा क्यों?किसान के द्वारा उगाई गई धान और गेहूं ही नहीं बल्कि सभी फसलों का बाजार में यही हाल है किसी भी फसल का किसान को उचित मूल्य आज नहीं मिल रहा है| इसके पीछे कहीं न कहीं इस देश की सरकारों की अनदेखी जरूर है|crops,इस देश की सरकारे जिनके लिए किसान आज एक वोट बैंक बन चुका है| राजनीतिक पार्टियों के लोगों को पता है कि चुनाव आने के समय किसान को थोड़ा सा लालच देना है, और किसान अपना वोट दे देगा और हमारी सरकार बन जाएगी उसके बाद 5 साल तक किसान की कोई सुध लेने की जरूरत नहीं है|सरकारे किसानों से वादा करती हैं कि हम आपकी आय को दोगुना करके दिखाएंगे|लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा है अभी तक कि सरकार किसानों की आय को दोगुनी करेगी कैसे क्योंकि अभी तक इस देश की किसी भी सरकार ने किसानों के सामने कोई भी रोड मेप नहीं रखा है|आज हम इस पोस्ट के जरिए सरकार से सिर्फ इतनी ही मांग करते हैं कि आप किसानों की फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ा दीजिए|हम सरकार से मांग करते हैं कि आप किसानों के गेहूं और धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2500 से ऊपर कर दीजिए|इससे किसानों को बहुत ज्यादा फायदा होगा|उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे वह अपनी लागत भी निकाल पाएंगे और उनको थोड़ा बहुत मुनाफा भी मिल जाएगा इससे किसान अपनी थोड़ी बहुत जरूरतें भी पूरी कर पाएगा|
अगर किसानों को सरकारे उनकी फसल का उचित मूल्य देना शुरु कर देती हैं तो फिर किसान का कर्ज माफ करने की भी आपको कोई जरूरत नहीं पड़ेगी|लेकिन सरकारे करती नहीं है|ऐसा क्यों होता है कहीं ना कहीं इसके पीछे भी हर राजनीतिक पार्टी राजनीति करती हैं|किसानों के वोट पाने के लिए राजनीतिक पार्टियां किसान के मुद्दों को जीवित रखना चाहती हैं ऐसा प्रतीत होता है|तभी तो हम देखते हैं कि चुनाव के समय किसानों को बड़ी-बड़ी योजनाओं की सौगात दी जाती हैं| बड़े-बड़े प्रलोभन दिए जाते हैं| उनका कर्ज माफ करने जैसी घोषणाये की जाती है|लेकिन कोई भी सरकार किसानों की समस्याओं का हमेशा के लिए समाधान करने को इच्छुक नहीं दिखाई देती है| आखिर इसके पीछे राजनीति नहीं है तो और क्या है?क्योंकि राजनीतिक पार्टियां जानती हैं अगर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य देना शुरू कर दिया और किसान को लाभ होना शुरू हो गया तो किसानों के वोट कैसे हासिल करेंगे|शायद इसीलिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर किसान की ऐसी हालत बना रखी है कि वह ना जी सके ना मर सके| और हमेशा उनके झूठे वादों के जाल में फंसा रहे|हमें तो यह समझ नहीं आ रहा है क्या इस देश की सरकार को किसान पसंद नहीं है|क्या इस देश की खेती इस देश की सरकारों को पसंद नहीं है|अगर ऐसा है तो हम अपनी तरफ से यहां पर कुछ बताना चाहते हैं|भविष्य में बड़ी से बड़ी टेक्नोलॉजी आ जाएगी, इंसान का हर काम आसान हो जाएगा| लेकिन एक बात याद रखना आपका पेट भरने की टेक्नोलॉजी कभी नहीं आएगी, उसके लिए तो किसान का उगाया गया अन्न ही काम आएगा|इसीलिए समय रहते इस देश के किसान को भी बचाओ और उसकी खेती को भी बचाओ|अंत में मैं एक बार फिर सभी किसान भाइयों की तरफ से हाथ जोड़कर सरकार से निवेदन करता हूं कि सरकार किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य देने की कृपा करें|किसानों के द्वारा उगाई गई धान और गेहूं जैसी फसलों का सरकार उन्हें ₹2500 प्रति क्विंटल से ज्यादा का समर्थन मूल्य देने की कृपा करें|तभी किसान की लागत निकलेगी और उसे कुछ मुनाफा मिलना शुरू होगा|और अंत में मैं किसान भाइयों से भी हाथ जोड़कर एक निवेदन करता हूं कि जब भी आपके राज्य में आपके क्षेत्र में चुनाव आए तब आप अपने क्षेत्र के उम्मीदवार से इस बात का वादा कभी ना लें कि आप हमारी कर्ज माफी करना| बल्कि आप वादा इस बात का करवाएं कि हमारी फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए|और जो राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवार इस बात का पक्का वादा किसानों से करता है हमें अपना वोट भी उसी को देना चाहिए क्योंकि जो किसान का नहीं है हम उन्हें अपना वोट क्यों दें

यह एक सवाल है इस पर विचार जरूर करना और अपनी प्रतिक्रिया देना|

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