गेहूं का पीला रतुआ रोग और उसका उपचार| गेहूं के रोग| पीला रतुआ रोग की दवाई

नमस्कार किसान भाइयों स्वागत है आप सभी का हमारी एक और नई पोस्ट में| आज हम आपको बताने वाले हैं गेहूं में पीला रतुआ रोग के बारे में इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि पीला रतुआ रोग आने से हमारी फसल में कितना नुकसान हो सकता है| और इसका रासायनिक उपचार क्या है|

किसान भाइयों गेहूं की फसल में अगर पीला रतुआ रोग आ जाता है तो हमारी फसल लगभग 80 से 90 परसेंट तक खराब हो सकती हैं इसीलिए समय पर इसका उपचार करना बहुत ही आवश्यक है|

किसान भाइयों अधिकतर जनवरी और फरवरी में लगने वाली गेहूं की फसलों में पीला रतुआ रोग आने की सबसे ज्यादा संभावना बनी रहती हैं|

किसान भाइयों यहां पर हम आपको बता दें कि सन 2011 में करीब 300000 हेक्टेयर गेहूं की फसल का नुकसान इस रोग यानी कि पीला रतुआ रोग से हुआ था|यह रोग भारत के पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, के तराई क्षेत्रों में आया था|

किसान भाइयों इन आंकड़ों को देखकर आप यह अनुमान लगा सकते हो कि पीला रतुआ रोग गेहूं की फसल के लिए कितना नुकसानदायक है| और इसका समय पर सही उपचार करना कितना जरूरी है|

रोग की पहचान|

किसान भाइयों यहां पर हम आपको बता दें कि गेहूं की फसल के पत्तों का पीला होना ही पीला रतुआ रोग नहीं है| इसके और भी बहुत सारे लक्षण होते हैं जो हम आपको यहां पर एक-एक करके बता रहे हैं–

1, रोग की चपेट में आई फसल की पत्तियों पर जब आप अपना हाथ गूमाओगे तो आपके हाथ पर पीला पदार्थ लग जाएगा|

2, पतियों की ऊपरी सतह पर पीले रंग की धारियां दिखाई देती है जो धीरे-धीरे पूरी पतियों को पिला कर देती है|

3, किसान भाइयों रोग की चपेट में आई फसल के खेत में जब आप जाओगे तो आपको जमीन पर पीला पाउडर गिरा हुआ दिखाई देगा|

4, किसान भाइयों शुरुआत में यह रोग कुछ एक पौधों पर शुरू होता है, और फिर धीरे-धीरे करके पूरे खेत में फैल जाता है|

रासायनिक उपचार|

किसान भाइयों अगर आपके गेहूं की फसल में इस रोग के लक्षण दिखते हैं| तो लक्षण दिखाई देते ही 200 मि.ली. प्रोपिकोनेजोल 25% EC, प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें|

किसान भाइयों अपनी गेहूं की फसल में रोग के प्रकोप और उसके फैलाव को देखते हुए जब तक यह रोग दूर ना हो जाए तब तक 10 से 15 दिनों के अंतराल में अपनी फसल पर 3 स्प्रे जरूर करें|

किसान भाइयों अपनी फसल को जैसे ही पीला रतुआ रोग के लक्षण दिखाई दे तुरंत इस पोस्ट में बताए गए रासायनिक उपचार करके फसल को इस रोग से मुक्त बनाएं|

किसान भाइयों इस रोग का हम आपको एक जैविक उपचार भी बताना चाहेंगे अगर आप अपनी फसल में रासायनिक उपचार ना करना चाहते हो तो इस पोस्ट में बताए गए जैविक उपचार को अपनाकर भी आप अपनी फसल को पीला रतुआ रोग से मुक्त कर सकते हो|

किसान भाइयों 5 लीटर मट्ठा को मिट्टी के घड़े में भर कर 7 दिनों तक मिट्टी में दबा दें| उसके बाद 40 लीटर पानी में 1 लीटर मट्ठा मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने से पीला रतुआ रोग से फसल को मुक्ति मिलती हैं|

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