गेहूं की जैविक खेती कैसे करें| what is organic agriculture

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नमस्कार किसान भाइयों स्वागत है आप सभी का हमारी एक और नई पोस्ट में|इसमें हम आपको बताने वाले हैं। गेहूं की जैविक खेती के बारे में कैसे हम गेहूं की जैविक खेती करके अपनी जमीन और अपने परिवार को जहर मुक्त बना सकते हैं| और जैविक खेती करके भी हम गेहूं की बंपर पैदावार ले सकते हैं।

भूमि का चयन कैसे करे|

गेहूं की खेती विभिन्न प्रकार की भूमि में की जा सकती है इसके लिए जमीन का पीएच मान 6.5 से 7.8 के बीच में रहना आवश्यक हैं। खेत में सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति जैविक कार्बन और सूक्ष्म जीवों की संख्या की जांच के लिए हर 2 वर्ष में एक बार मिट्टी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए। यदि जैविक कार्बन की मात्रा 1% से कम हो तो लगभग 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर कार्बनिक खाद का उपयोग करें खाद को अच्छी तरीके से मिलाने के लिए खेत की दो से तीन बार अच्छी जुताई करनी चाहिए।

बिजाई का समय|

गेहूं की अच्छी पैदावार लेने के लिए बिजाई सही समय पर करनी चाहिए। अगर गेहूं की बिजाई देरी से की जाए तो उत्पादन में कमी आ सकती हैं। गेहूं की बिजाई के सही समय के अगर हम बात करें तो नवंबर से दिसंबर का महीना गेहूं की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

भूमि उर्वरकता प्रबंधन|

गेहूं की जैविक खेती में रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं किया जाता है। अत: गेहूं की जैविक खेती करने वाले 15 टन देसी खाद प्लस 2 टन कंपोस्ट खाद प्रति हेक्टेयर कि दर से उपयुक्त होती है| जैविक खेती में सूक्ष्मजीवों की शीघ्र बढ़ोतरी के लिए विभिन्न पोषक तत्वों का संजीवक,अमृत पानी अथवा जीवामृत का समय प्रयोग आवश्यक है। इन तीनों में से जीवामृत सबसे अच्छा है। बुवाई के बाद पहली 4 सिचाई के दौरान 500 लीटर जीवामृत प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाना चाहिए।पानी की उपलब्धता के आधार पर गेहूं की अच्छी उपज लेने के लिए समय पर पानी अवश्य लगाएं।

सिंचाई कब करे|

किसान भाइयों गेहूं की सिंचाई वैसे तो भूमि के आधार पर की जाती है। जीन किसान भाइयों के हल्की जमीन होती हैं। उन किसान भाइयों को गेहूं की सिंचाई ज्यादा बार करनी होती है, और जिन किसान भाइयों के कठोर और ज्यादा दिनों तक पानी स्टोर करने वाली जमीन होती है| उन किसान भाइयों को कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। लेकिन फिर भी आपको यह ध्यान रखना होता है, कि जैसे ही जमीन की ऊपरी परत सूखने लग जाए तुरंत अपनी गेहूं की फसल को पानी लगा देना चाहिए।

हल्की जमीन में पानी की आवश्यकता 15 से 20 दिनों के अंतराल में पढ़ती हैं| और भारी जमीन में पानी की आवश्यकता 25 से 30 दिनों के अंतराल में पढ़ती हैं।

खरपतवार प्रबंधन|

गेहूं की जैविक खेती में खरपतवार को खत्म करने के लिए किसी भी दवाई का उपयोग नहीं किया जाता है। इसके लिए किसान भाइयों को हाथों से ही फसल की निराई गुड़ाई करनी होती है। हर 25 दिन के अंतराल में फसल की एक बार निराई गुड़ाई जरूर करें। फसल को कुल 3 बार निराई गुड़ाई की आवश्यकता होती है।

फसल की अधिक बार निराई गुड़ाई करने से फसल खरपतवार मुक्त भी रहती हैं। और पौधे की जड़ों को प्रकाश और हवा मिलती है जिससे पौधा अच्छी ग्रोथ करता है।

रोग प्रबंधन|

अपनी फसल को रोगों से बचाने के लिए 2 से 3 साल में नई किस्म का चयन अवश्य करें। फसल को पीला रतूआ, पीला फफूंदी रोगों से बचाने के लिए। खट्टी छाछ 2 किलो को पानी के साथ मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें इससे फायदा मिलता है।

उत्पादन|

किसान भाइयों गेहूं की जैविक खेती करके भी आप अपने खेत से काफी अच्छा उत्पादन ले सकते हैं। गेहूं के जैविक खेती के औसत उत्पादन की अगर हम बात करें तो लगभग 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से आप गेहूं का उत्पादन प्राप्त कर सकते हो।

इसके अलावा जैविक गेहूं की अच्छी मार्केटिंग करके आप इन्हें अपने घर से ही बाजार में सेल कर सकते हो। इससे आपको घर बैठे अच्छा मुनाफा भी मिल जाएगा।

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