गेहूं की दोगुनी पैदावार कैसे प्राप्त करें

गेहूं की खेती भारत देश में ही नहीं पूरे विश्व में लगभग 23 प्रतिशत भूमि पर की जाती हैं विश्व में सबसे अधिक क्षेत्रफल में गेहूं उगाने वाले प्रमुख तीन राष्ट्र भारत,रशियन फेडरेशन और संयुक्त राज्य अमेरिका है| गेहूं उत्पादन में चीन के बाद भारत तथा अमेरिका का नंबर आता है|

उपयुक्त जलवायु

गेहूं मुख्यतः एक ठंडी एवं शुष्क जलवायु की फसल है अतः फसल बोने के समय 20 से 22 डिग्री सेल्सियस बढ़वार के समय तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तथा पकने के समय 14 से 15 डिग्री सेल्सियस ताप क्रम उचित रहता है| अगर मौसम में अचानक बदलाव आ जाता है वह तापमान बढ़ जाता है तो फसल जल्दी पक जाती है और नतीजा यह निकलता है कि फसल की पैदावार घट जाती है|

भूमि का चयन

गेहूं सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमि में पैदा हो सकता है परंतु दोमट से भारी दोमट जलोढ़ मृदाओं में गेहूं की खेती सफलतापूर्वक की जाती है| भूमि का पीएच मान 5 से 7.5 के बीच होना फसल के लिए उपयुक्त रहता है

खेत की तैयारी

गेहूं के अच्छे अंकुरण के लिए एक बेहतर भुरभुरी मिट्टी की आवश्यकता होती है समय पर जुताई खेत में नमी सरंक्षण के लिए भी आवश्यक है| खेत खरपतवार मुक्त होना चाहिए ताकि बुवाई आसानी से उचित गहराई तथा समान दूरी पर की जा सके

उन्नत किस्में

गेहूं की फसल उत्पादन में उन्नत किस्मों के बीज का महत्वपूर्ण योगदान है|अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग प्रकार की उन्नत प्रजातियां मौजूद है|

बीजोपचार

बुवाई के लिए जो गेहूं का बीज इस्तेमाल किया जाता है वह रोग मुक्त होना,चाहिए प्रमाणिक होना चाहिए|इसके अलावा रोगों की रोकथाम के लिए ट्राइकोडरमा की 4 ग्राम मात्रा 1 ग्राम कार्बेंडाजिम के साथ प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीज शोधन किया जा सकता है|

बोआई का समय

गेहूं रबि की फसल है जिसे शीतकालीन मौसम में उगाया जाता है| सामान्य तौर पर गेहूं की बुवाई अक्टूबर से दिसंबर तक की जाती है तथा फसल की कटाई फरवरी से मई तक की जाती है|

बीज की गहराई

गेहूं की बुवाई करते समय गहराई का विशेष ध्यान रखना होता है| क्योंकि गेहूं की बोनी अगर ज्यादा गहराई पर कर दी जाए तो गेहूं का अंकुरण बहुत ही कम होता है और आपका खेत पूरा खाली पड़ा रहता है| गेहूं की बोनी करते समय गहराई 3 सेंटीमीटर से 5 सेंटीमीटर रखते हैं|

खाद व उर्वरक

गेहूं की फसल में पैदावार बढ़ाने में बहुत कुछ खाद एवं उर्वरक की मात्रा पर निर्भर करती है| गेहूं में पैदावार बढ़ाने के लिए हरी खाद जैविक खाद एवं रासायनिक खाद का प्रयोग किया जाता है अच्छी उपज लेने के लिए भूमि में कम से कम 35 से 40 क्विंटल गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद 50 किलोग्राम नीम की खली और 50 किलोग्राम अरंडी की खली आदि इन सब खादो को अच्छी तरह मिलाकर खेत में बुवाई से पहले मिश्रण को समान मात्रा में बिखेर ले इसके बाद खेत में अच्छी तरह से जुताई कर खेत को तैयार करें इसके उपरांत बुवाई करें|

अगर हम रासायनिक उर्वरकों की बात करें तो नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश मुख्य तत्व है| गेहूं की बोनी करते समय 125 किलोग्राम नाइट्रोजन 50 किलोग्राम सुपर फास्फेट वह 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए|

नाइट्रोजन का एक भाग फास्फोरस का पूरा भाग और पोटाश का पूरा भाग गेहूं की बोनी के टाइम पर देना उचित माना गया है|

तो किसान भाइयों इस प्रकार से आप भी अपनी गेहूं की फसल में इन सभी जरूरी बातों का ध्यान रखकर अपनी गेहूं की पैदावार को बढ़ा सकते हो|

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *