बैंगन की उन्नत खेती|कम जगह में अधिक मुनाफा।

नमस्कार किसान भाइयों स्वागत है आप सभी का हमारी एक और नई पोस्ट में आज की इस पोस्ट में हम आपको बताने वाले बैंगन की उन्नत खेती के बारे में। बैंगन की उन्नत खेती करके आप कम जगह में अधिक मुनाफा कमा सकते हो बैंगन की खेती अधिक ऊंचाई वाले स्थानों को छोड़कर भारत में लगभग सभी क्षेत्रों में प्रमुख फसल के रूप में की जाती हैं। बैंगन की हरी पत्तियों में विटामिन सी पाया जाता है।

भूमि का चयन।

इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली सभी प्रकार की भूमि उपयुक्त होती हैं। बैंगन की अच्छी उपज के लिए बलुई दोमट से लेकर भारी मिट्टी जिसमें कार्बनिक पदार्थ की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। भूमि का पीएच मान 5 पॉइंट 5 से लेकर 6 पॉइंट 0 के बीच होना चाहिए तथा इसमें सिंचाई का उचित प्रबंधन होना चाहिए।

बैंगन की उन्नत किस्में?

बैंगन के फल मुख्यतः बैंगनी सफेद, हरे, गुलाबी, एवं धारीदार रंग के होते हैं आकार में भिन्नता के कारण इसके फल गोल अंडाकार लंबे एवं नाशपाती के आकार के होते हैं।

बैंगन की निम्नलिखित उन्नत किस्में–

स्वर्ण शक्ति।

यह एक संकर किस्म है|पैदावार की दृष्टि से भी काफी उत्तम है। इसके पौधे की लंबाई लगभग 70 से 80 सेंटीमीटर होती है। फल लंबे चमकदार बैंगनी रंग के होते हैं। इस किस्म से 700 से 750,क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज प्राप्त की जा सकती है।

स्वर्ण श्री

इस किस्म के पौधे 60 से 70 सेंटीमीटर लंबे होते हैं| अधिक शाखाओं वाले होते हैं|चौड़ी पत्ती वाले होते हैं|फल अंडाकार सफेद रंग के मुलायम होते हैं। इस किस्म की पैदावार 550 से लेकर 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है।

इन किस्मों के अलावा भी स्वर्ण मणि,स्वर्ण श्यामली, स्वर्ण प्रतिभा, आदि प्रकाश की उन्नत किस्में मौजूद हैं।

पौधे की नर्सरी कैसे तैयार करें

किसान भाइयों नर्सरी के पौधों को बीमारियां एवं कीटों से बचाने के लिए पौधशाला की मिट्टी को। प्रकाश से उपचारित करते हैं इसके लिए 5 से 15 अप्रैल के बीच 3 फीट चौड़ाई की एवं 1 मीटर लंबाई। और 20 से 30 सेंटीमीटर ऊंची क्यारिया बनाते हैं? प्रत्येक क्यारी 20 से 25 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद तथा 1 किलोग्राम नीम की खली डालकर अच्छी तरह से मिलाना चाहिए। उसके बाद क्यारियों की अच्छी सिंचाई करके पारदर्शी प्लास्टिक की चादर से ढक कर मिट्टी से दबा दिया जाता है। इस क्रिया से क्यारी से हवा एवं भाप बाहर नहीं निकलती और 40 से 50 दिन में मिट्टी में रोगजनक कवको एवं हानिकारक कीटों की उग्रता कम हो जाती है।

पौधे की बुवाई।

किसान भाइयों बैंगन की शरद कालीन फसल के लिए जुलाई-अगस्त में, ग्रीष्मकालीन फसल के लिए जनवरी-फरवरी में, एवं वर्षा कालीन फसल के लिए अप्रैल में बीजों की बुवाई की जानी चाहिए। एक हेक्टेयर खेत में बैंगन की रोपाई के लिए सामान्य किस्मों का 250 से 300 ग्राम एवं संकर किस्मों का 200 से 250 ग्राम बीज पर्याप्त होता है।

बीज से बीज की दूरी एवं बीज की गहराई 0.5 से लेकर 1.0 सेंटीमीटर के बीच रखनी चाहिए।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

किसान भाइयों बैंगन की अच्छी पैदावार के लिए 200 से ढाई सौ क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग खेत की मिट्टी में अच्छी तरीके से मिलाकर करना चाहिए।

इसके अलावा फसल में लगभग 130 से 150 किलोग्राम नत्रजन। 60 से 75 किलोग्राम फास्फोरस। तथा 50 से 60 किलोग्राम पोटाश। की प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यकता होती है।

पौधों का रोपण एवं तुड़ाई।

पौधशाला में तैयार किए जा रहे हैं पौधे 21 से 25 दिन पश्चात लगाने के लिए तैयार हो जाते हैं। बैंगन की शरद कालीन फसल के लिए जुलाई-अगस्त में, ग्रीष्मकालीन फसल के लिए जनवरी-फरवरी में, एवं वर्षा कालीन फसल के लिए अप्रैल-मई में रोपाई की जानी आवश्यक है। अच्छी पैदावार के लिए फसल को उचित दूरी पर लगाना आवश्यक होता है। संकर किस्मों के लिए कतारों के बीच 75 सेंटीमीटर एवं पौधों के बीच 60 सेंटीमीटर दूरी रखना उचित होता है। फसल की समय-समय पर निराई गुड़ाई करनी आवश्यक होती है। पहली निराई गुड़ाई रोपाई के 25 से 30 दिन पश्चात एवं दूसरी निराई गुड़ाई 35 से 45 दिन के बाद करें।

किसान भाइयों बैंगन के फलों की तूड़ाई मुलायम एवं चमकदार अवस्था में कर लेनी चाहिए। तुडाई में देरी करने से फल सख्त हो जाते हैं। साथ ही उनमें बीज का विकास हो जाता है जिससे बाजार में फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।

कीट एवं रोग नियंत्रण कैसे करें

तना एवं फल छेदक

यह कीट फसल को काफी नुकसान पहुंचाता है। इसके लार्वा पति के जुड़े होने के स्थान पर छेद बनाकर डाली के अंदर घुस जाते हैं। जिससे टहनी का विकास रुक जाता है। बाद में आगे का भाग सूख जाता है फल आने पर इसके लार्वा छेद करके फल के अंदर घुसकर बीज को खाते हैं। इसकी रोकथाम हेतु इनसे प्रभावित शाखाओं को किट सहित तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए। फसल में फेरोमोन पास लगाकर इस कीट के प्रभाव को कम किया जाता है। फलों पर कीट का प्रकोप दिखाई देने पर नीम के तेल का 4 परसेंट की दर से गोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर फसल पर स्प्रे करें।

फल का सड़ना

किसान भाइयों यह रोग फफूंद के कारण होने वाला एक बीज जनित रोग है| प्रभावित पत्तियों पर प्रारंभ में छोटे-छोटे भूरे धब्बे बन जाते हैं, तथा बाद में अनियमित आकार के काले धब्बे पत्तियों के किनारों पर दिखाई देते हैं। रोगी पत्तियां पीली पढ़कर सूख जाती हैं|

इस रोग के नियंत्रण के लिए। बाविस्टिन 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से बीज उपचार के बाद बुवाई करें।

मुरझा रोग।

किसान भाइयों यह एक प्रमुख बीमारी है। इसके प्रकोप से पौधे मर जाते हैं। इसके बचाव हेतु प्रतिरोधी किस में जैसे स्वर्ण प्रतिभा स्वर्ण शामली लगाए लगातार बैंगन टमाटर मिर्च एक ही स्थान पर लगाने से भी इस रोग का प्रकोप अधिक होता है।

इस रोग से बचाव के लिए रोपाई के पूर्व पौधों की जड़ों को स्टेप्टोसाइक्लिन 50 मिलीग्राम प्रति लीटर के घोल में आधे घंटे तक डुबोये रखें।

तो किसान भाइयों इस पोस्ट में बताई गई जरूरी बातों को ध्यान में रखकर आप भी बैंगन की उन्नत खेती कर सकते हैं और अपनी कम जमीन में भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

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