लहसुन की उन्नत खेती कैसे करें?

नमस्कार  किसान भाइयों। आज की इस पोस्ट में हम बात करने वाले लहसुन की उन्नत खेती के बारे में। आज कि इस पोस्ट में आपको बताया जाएगा कि लहसुन की खेती कौन सी जमीन में होती है? किस प्रकार से लहसुन की उन्नत खेती आप कर सकते हैं? और अपनी खेती को मुनाफे का धंधा बना सकते। साथ में आपको यह भी बताया जाएगा कि लहसुन की खेती भारत मे कहां कहां पर होती है| लहसुन के लिए मौसम और जलवायु किस प्रकार की चाहिए|सब कुछ आपको इस पोस्ट में जानने को मिलेगा।

लहसुन के लिए उपयुक्त जलवायु।

किसान भाइयों जैसा कि आप जानते हो लहसुन को एक मसाला के रूप में भारत में प्रयोग किया जाता है। लहसुन की खेती कई प्रकार की जलवायु में की जा सकती हैं? बहुत गर्म या ठंडे मौसम में इसकी खेती नहीं की जा सकती हैं। लहसुन के कंद के विकास के लिए लघु दिन बहुत ही अनुकूल होते हैं।

कहां कहां पर होती है लहसुन की खेती|

लहसुन की खेती आमतौर पर आंध्र प्रदेश,उत्तर प्रदेश, मद्रास और गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान में की जाती है। यह मानव रक्त में कोलेस्ट्रॉल कम कर देता है।

खेत की तैयारी।

लहसुन की फसल लगाने के लिए खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करना आवश्यक है। इसके पश्चात खेत में रोटावेटर चलाकर मिट्टी को अच्छी तरीके से भूर भरी कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही खेत में 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद डालकर उसे मिट्टी में अच्छी तरीके से मिला देना चाहिए। उसके बाद खेत में डेढ़ से 2 मीटर चौड़ाई वाली समतल क्यारियां बना लेनी है।

लहसुन की फसल के लिए उपयुक्त मिट्टी|

लहसुन की खेती के लिए काली मिट्टी। चिकनी बलुई मिट्टी जिसमें पोटाश की काफी अच्छी मात्रा हो उसे उपयुक्त माना गया है। लहसुन जमीन के नीचे तैयार होने वाली फसल है जिसकी जड़ें जमीन से अधिकतम 20 से 25 सेंटीमीटर तक जाती हैं। इसीलिए ऐसी भूमि का चयन करें जो कंकड़ पत्थर रहित हो। इसके साथ ही लहसुन की खेती के लिए बलुई दोमट भूमि को भी उत्तम माना गया है। लहसुन की खेती भारी मृदा में नहीं होती है, क्योंकि इसमें जल निकास उपयुक्त नहीं होने के कारण लहसुन के कंद का समुचित विकास नहीं हो पाता है, और कंद छोटा रह जाता है। इस कारण भारी मृदा में लहसुन नहीं लगाना चाहिए।

भूमि का पीएच मान। 5.8 से 6. 5 के मध्य होना चाहिए।

लहसुन बोने के लिए बीज दर।

किसान भाइयों हम आपको बता दें कि लहसुन के लिए 400 से 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज पर्याप्त होता है।

लहसुन की रोपाई कैसे करें?

किसान भाइयों खेत में लहसुन की रोपाई करने से पहले लहसुन की छोटी कलियां और बड़ी कलियां दोनों को अलग अलग कर ले। लहसुन की बड़ी कलियां खेत में रोपाई के लिए उपयुक्त मानी गई है। छोटी कलियों की खेत में रोपाई ना करें क्योंकि फिर उनसे पौधे भी छोटे रहते हैं,रोग ग्रस्त हो जाते हैं, और पैदावार अच्छी नहीं होती हैं। इसीलिए लहसुन की रोपाई करते वक्त हमेशा ध्यान रखें कि लहसुन की बड़ी कलियों का चयन करें।

फिर उसके बाद चयनित की गई कलियां 10 सेंटीमीटर दूरी पर। कलियां लगानी चाहिए।

लहसुन की निराई, गुड़ाई

किसान भाइयों लहसुन की फसल में आप किसी भी प्रकार की खरपतवार नाशक दवाई का उपयोग ना करें तो यह सबसे उपयुक्त माना गया है। लहसुन की हमेशा हाथों से निराई गुड़ाई होनी चाहिए। पहली निराई गुड़ाई खुरपी से बुआई के 1 महीने बाद किया जाना चाहिए, और दूसरी निराई गुड़ाई बुवाई के 2 महीने के बाद किया जाता है।लहसुन कंद के उचित विकास के लिए निराई गुड़ाई आवश्यक है।

लहसुन में खाद की मात्रा।

लहसुन की फसल के लिए नाइट्रोजन 100 किलोग्राम फास्फोरस 50 किलोग्राम एवं पोटाश 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यक हैं। खेत में लहसुन की रोपाई करते समय पोटाश की पूरी मात्रा फास्फोरस की पूरी मात्रा एवं नाइट्रोजन का एक भाग लहसुन बुवाई के समय देना चाहिए। नाइट्रोजन के बाकी बचे दो भाग रोपाई के 25 से 30 दिन एवं 40 से 45 दिन में निराई गुड़ाई करते समय दे देना चाहिए।

लहसुन में सिंचाई।

लहसुन में पहली सिंचाई बुवाई के बाद कर देनी चाहिए। लहसुन की फसल को शुरुआत में हल्का परंतु कम अंतर पर पानी देने की आवश्यकता होती हैं। सूखे खेत में रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई की जानी चाहिए नई जड़े विकसित होने तक खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। इसीलिए रोपाई के बाद की गई सिंचाई के दो-तीन दिन बाद दूसरी सिंचाई की आवश्यकता होती है। एक बार पौधे को स्थापित हो जाने के बाद प्रारंभिक समय में पानी की आवश्यकता कम हो जाती हैं।

लहसुन की खुदाई और ऊपज|

लहसुन की खेती लगभग 5 महीनों के आसपास की फसल है। जब पत्ते पीले या भूरा होने प्रारंभ करें और सूखने के लक्षण दिखे तब पौधे कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं। देशी हल या ट्रैक्टर कुली की मदद से पौधे को बाहर निकाल लिया जाता है| और कम से कम दो-तीन दिनों के लिए खेत में सूखने के लिए छोड़ दें ताकि लहसुन का कंद मजबूत बन सके।

किसान भाइयों अगर हम लहसुन की उपज की बात करें तो 50 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर लहसुन की उपज आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं।

लहसुन पर लगने वाले कीट|

थ्रीप्स लहसुन का एक प्रमुख नुकसानदायक कीट है| यह कीट आकार में बहुत छोटे होते हैं।ये कीट नयी पत्तियों का रस चूसते हैं कीड़ों के रस चूसने से पत्तियों पर असंख्य सफेद रंग के निशान दिखते हैं। अधिक प्रकोप से पत्तियां मोड़ कर झुक जाती हैं। जिसे हम जलेबी रोग के नाम से भी जानते हैं। फसल की किसी भी अवस्था में कीड़ों का प्रकोप हो सकता है। रोपाई के तुरंत बाद इसके प्रकोप से पत्तियां मूडने के कारण कंद का पोषण नहीं होता है। इससे फिर पौधे में और अधिक रोग बढ़ने लगते हैं।

रोकथाम।

. साइपरमीथ्रिन 10%EC, 5 मिली.। या प्रोफेनोफास 10 मिली.। में से कोई एक दवा प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर। छिड़काव करना चाहिए इस प्रकार कम से कम। चार बार छिड़काव की आवश्यकता होती है।

इन जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप सभी भी। लहसुन की वैज्ञानिक खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हो।

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