भिंडी की खेती कैसे करे|

भिंडी एक लाभकारी सब्जी

किसान भाइयों जैसा की आप सब जानते हैं कि भिंडी एक लोकप्रिय सब्जी हैं| सब्जियों में भिंडी का प्रमुख स्थान है|

भिंडी की अगेती फसल लगाकर किसान भाई लाखों का मुनाफा अर्जित कर सकते हैं| मुख्य रूप से भिंडी में प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवणों जैसे कैल्शियम, फास्फोरस के अतिरिक्त विटामिन ए, बी, सी, थाईमीन एवं रिबोफ्लेविन भी पाया जाता है|

किसान भाइयों भिंडी का फल कब्जे रोगी के लिए विशेष गुणकारी होता है| भिंडी के फल में आयोडीन की मात्रा अधिक होती हैं|

खेत की तैयारी

भिंडी के लिए गर्म व नम वातावरण श्रेष्ठ माना जाता है| बीज उगने के लिए 27 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त होता है| तथा 17 डिग्री सेंटीग्रेड से कम पर बीज अंकुरित नहीं होता है| यह फसल ग्रीष्म तथा खरीफ दोनों ही ऋतु में उगाई जाती हैं| भिंडी को उत्तम जल निकास वाली सभी तरह की भूमियों में उगाया जा सकता है|भूमि का पीएच मान 7. 0 से 7.8 होना उपयुक्त रहता है|

उत्तम किस्में कौन सी है

पूसा A-4

यह भिंडी की एक उन्नत किस्म है| यह प्रजाति 1995 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा निकाली गई है| यह एफीड तथा जेसिड के प्रति सहनशील है|यह पित्तरोग येलो वेन मोजेक विषाणु रोधी हैं|इस फसल को बोने के लगभग 15 दिन बाद से फल आना शुरू हो जाते हैं| तथा पहली तूड़ाई 45 दिनों बाद शुरू हो जाती हैं|

भिंडी की और भी बहुत सारी उन्नत प्रजातियां मौजूद हैं जैसे——

परभणी क्रांति

पंजाब 7

अर्का अभय

अर्का अनामिका

वर्षा उपहार

हिसार उन्नत

V R O —6

बीज की मात्रा और बुवाई का तरीका

सिंचित अवस्था में 2.5 से 3 किलोग्राम तथा असिंचित अवस्था में 5 से 7 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है| संकर किस्मों के लिए 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की बीज दर पर्याप्त होती हैं| भिंडी के बीज सीधे खेत में ही बोए जाते हैं| बीज बोने से पहले खेत को तैयार करने के लिए दो-तीन बार जुताई करनी चाहिए वर्षा कालीन भिंडी के लिए कतार से कतार की दूरी 40 से 45 सेंटीमीटर एवं कतारों में पौधे से पौधे के बीच की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर का अंतर रखना उचित रहता है| भिंडी के बीज की 2 से 3 सेंटीमीटर गहरी बुवाई करनी चाहिए| बुवाई के पूर्व भिंडी के बीजों को 3 ग्राम मैनकोज़ेब कार्बेंडाजिम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए|

बूआई का समय

ग्रीष्मकालीन भिंडी की बुवाई फरवरी-मार्च में तथा वर्षा कालीन भिंडी की बुवाई जून-जुलाई में की जाती है|

खाद और उर्वरक

भिंडी की फसल में अच्छा उत्पादन लेने के लिए प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 15 से 20 टन गोबर की खाद नत्रजन, सल्फर, एवं पोटाश की मात्रा 80 किलोग्राम 60 किलोग्राम, 60 किलोग्राम, प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में दे देना चाहिए| नत्रजन की आधी मात्रा सल्फर एवं पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के पूर्व भूमि में देना चाहिए| नत्रजन की शेष मात्रा को दो भागों में 30 से 40 दिनों के अंतराल पर देना चाहिए|

सिंचाई

भिंडी की फसल की सिंचाई मार्च में 10 से 12 दिन,अप्रैल में 7 से 8 दिन,और मई-जून में 4 से 5 दिन के अंतर पर करें|

तो किसान भाइयों जैसा इस पोस्ट में आपको बताया गया है वैसे ही आप भी अगर भिंडी की खेती करना चाहते तो कर सकते हो|और भिंडी की खेती से काफी अच्छा मुनाफा कमा सकते हो|

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